Meaning of

जुल्म-ओ-सितम

julm-o-sitam • ظلم و ستم

अत्याचार और ज़ुल्म; क्रूरता और अन्याय

oppression and tyranny; cruelty and injustice

ظلم و ستم; ظلم و ناانصافی

Arabic

क्या ये भी किसी जंग के ऐलान से कम है
हम सह के तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम घूम रहे हैं

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ख़ुदा जाने वो ऐसे कैसे क्यूँ ये मर्द पाले हैं
सियासी लोग अपने दल में दहशतगर्द पाले हैं

किया करते हैं जो ज़ुल्म-ओ-सितम हर बेबसों पर यूँँ
वो अपने आस्तीनों में फ़क़त बे-दर्द पाले हैं

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ज़माने के ज़ुल्म-ओ-सितम देख लो
मिरी ज़िंदगी के भी ग़म देख लो

क़यामत से बढ़कर रहे हैं सभी
कमर के न मानो तो ख़म देख लो

मोहब्बत तो करने चले हो मगर
मोहब्बत में क्या-क्या हैं ग़म देख लो

ये ख़ंजर चलाने से पहले सुनो
मिरा हाल तो कम से कम देख लो

अरे अब के ज़ाहिद भी पीने लगे
न मानो तो दैर-ओ-हरम देख लो

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मुझ को ज़ुल्म ओ सितम से है मारा गया
फूल को ख़ार से यूँँ सँवारा गया

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देख कर ज़ुल्म-ओ-सितम मज़लूम पर
आज फिर इंसानियत शर्मा गई

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हज़रत-ए-दिल पे इतने ज़ुल्म-ओ-सितम
हुस्न-दाँ मत करो ख़ुदा के लिए

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ख़ुद ब ख़ुद बुझ जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम के सब दिए
सब जलाएँ गर जो इंसाफ़- ओ- अदल का इक दिया

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पड़ेगा कूदना मँझधार में गर चाहिए मोती
किसी ने भी नहीं पाया कभी मोती किनारों पर

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क्या ये भी किसी जंग के ऐलान से कम है
हम सह के तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम घूम रहे हैं

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ख़ुदा जाने वो ऐसे कैसे क्यूँ ये मर्द पाले हैं
सियासी लोग अपने दल में दहशतगर्द पाले हैं

किया करते हैं जो ज़ुल्म-ओ-सितम हर बेबसों पर यूँँ
वो अपने आस्तीनों में फ़क़त बे-दर्द पाले हैं

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'जुल्म-ओ-सितम' अत्याचार और क्रूरता की कठोर वास्तविकताओं को समेटे हुए है। कविता में, इसका उपयोग अक्सर अत्याचार के खिलाफ संघर्षों को उजागर करने के लिए किया जाता है, जो पीड़ा और प्रतिरोध की एक जीवंत तस्वीर पेश करता है।

कवि 'जुल्म-ओ-सितम' का उपयोग अन्याय के दर्द और इसे सहने वालों की दृढ़ता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह मानव आत्मा की प्रतिरोध और विजय की क्षमता की एक शक्तिशाली याद दिलाता है।

कविता में, 'जुल्म-ओ-सितम' न्याय और गरिमा के लिए चल रहे संघर्ष का प्रमाण है।