Meaning of

जुर्अत

jur'at • جرأت

साहस; निर्भीकता

courage; boldness

جرات; بے باکی

Arabic

ग़रीब-ओ-बे-कसों की सब हिमायत क्यूँ नहीं करते
ग़लत को तुम ग़लत कहने की जुरअत क्यूँ नहीं करते

अगर अहल-ए-जहाँ ज़िंदा हो तो बे-ख़ौफ़ होकर फिर
भला ज़ालिम हुकूमत की मज़म्मत क्यूँ नहीं करते

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सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है

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उस लब से मिल ही जाएगा बोसा कभी तो हाँ
शौक़-ए-फ़ुज़ूल ओ जुरअत-ए-रिंदाना चाहिए

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दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती

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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम

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देखो जिन के पैर नहीं हैं वो जुरअत करते हैं
कोई दोनों पैरों से भी लँगड़ा हो सकता है

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कब से तुम कह रही हो कि फ़ुर्सत नहीं
कहती ये क्यूँ नहीं मेरी जुरअत नहीं

अब ये कहने में कितने लगेंगे दिन और
अब मुझे तुम सेे कोई मुहब्बत नहीं

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हम अपनी छत पर इबादतों में जो सर झुकाएँ गुनाह कैसा
हम अपने हक़ के लिए लड़ेंगे तिरी ये जुरअत नहीं चलेगी

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क़लम को ही बना शमशीर हिम्मत कर
जो तेरा है उसे लेने की जुर्रत कर

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इश्क़ करने का शौक़ रखते हो गर
जुरअत-ए -हिज्र- ए- जावेदानी भी रख

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ग़रीब-ओ-बे-कसों की सब हिमायत क्यूँ नहीं करते
ग़लत को तुम ग़लत कहने की जुरअत क्यूँ नहीं करते

अगर अहल-ए-जहाँ ज़िंदा हो तो बे-ख़ौफ़ होकर फिर
भला ज़ालिम हुकूमत की मज़म्मत क्यूँ नहीं करते

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सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है

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'जुर्अत' शब्द साहस और निर्भीकता की भावना को समाहित करता है। अपने मूल में, यह चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक आंतरिक शक्ति की बात करता है। कविता में, यह अक्सर विपत्ति के खिलाफ विद्रोह और सीमाओं से परे सपने देखने की धृष्टता का प्रतीक होता है।

कवि 'जुर्अत' का उपयोग बहादुरी और दृढ़ता के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भय के सामने दृढ़ रहने के नायकत्व या यथास्थिति को चुनौती देने वाली विद्रोही भावना को चित्रित कर सकता है। यह शब्द संकोच के विपरीत है, जो मानव आत्मा की वीरता को उजागर करता है।

'जुर्अत' के हृदय में, कोई वह आग पाता है जो सपनों को ईंधन देती है और उन्हें पूरा करने का साहस देती है।