Meaning of

करम

karam • کرم

कृपा; दया; अनुग्रह

grace; kindness; favor

کرم; مہربانی; عنایت

Arabic

अल्लाह की इबादत अब घर में कम नहीं है
उन का बहुत करम है जो घर में ग़म नहीं है

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बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

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'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी
सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज

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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है
किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है

हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने
यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है

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तसद्दुक़ इस करम के मैं कभी तन्हा नहीं रहता
कि जिस दिन तुम नहीं आते तुम्हारी याद आती है

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सितम भी मुझ पे वो करता रहा करम की तरह
वो मेहरबाँ तो न था मेहरबान जैसा था

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शब जो होली की है मिलने को तिरे मुखड़े से जान
चाँद और तारे लिए फिरते हैं अफ़्शाँ हाथ में

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सामान नफ़रतों का है बिस्यार देखिए
धीमी पड़ी सफ़र कि ये रफ़्तार देखिए

गुलज़ार को करम कि ज़रूरत कभी न थी
सूखे पड़े हुए हैं जो इशजार देखिए

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करम हैं आप के ही झूठे वादे के
कि हँस देते हैं हम रोते रहें तो‌ भी

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ये तेरा हुस्न उफ़ पल पल मुझे घाइल ही करता है
तेरे ही इश्क़ का बस है करम जो मैं कि ज़िंदा हूँ

मुझे आवाज़ दे दे तो मैं आख़िर क्यूँ न आऊँगा
अरे मैं तो तेरा पाला हुआ आशिक़ परिंदा हूँ

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अल्लाह की इबादत अब घर में कम नहीं है
उन का बहुत करम है जो घर में ग़म नहीं है

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बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

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अपने मूल अर्थ में, 'करम' एक दिव्य कृपा या उदारता को दर्शाता है, जो अक्सर एक उच्च शक्ति की उदारता से जुड़ा होता है। कविता में, यह एक हृदय से दूसरे हृदय तक बहने वाली दया और करुणा का प्रतीक बन जाता है, एक कोमल स्पर्श जो चंगा कर सकता है और उठाता है।

'करम' का उपयोग कवि अक्सर दया के गहरे प्रभाव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे प्रिय की उदारता, एक देवता की दया, या जीवन की परीक्षाओं में मिली अप्रत्याशित कृपा को चित्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

करम दया की शक्ति की एक कोमल याद दिलाता है, एक धागा जो मानव अनुभव के ताने-बाने में बुना हुआ है।