Meaning of

कौड़ी

kaudi • کوڑی

शंख; छोटी मुद्रा; तुच्छ वस्तु

shell; small coin; worthless thing

صدف; چھوٹا سکہ; بے قیمت چیز

Sanskrit

फूटी कौड़ी भी पास नहीं पर
दिल से तो हम राजा हैं यारों

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घर आते आते सौदागर हो जाऊँ
इतना भी बाज़ार नहीं देखूंगा मैं

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पूछ रहे हैं मुझ सेे पेड़ों के सौदागर
आब-ओ-हवा कैसे ज़हरीली हो जाती है

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सहने वाले को गर सब्र आ जाए तो फिर समझो
कहने वालों की औक़ात फ़क़त दो कौड़ी की है

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ख़रीदो कौड़ियों के भाव में मुझ को
मैं सस्ता हो गया हूँ उस के जाने से

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डरेंगे हम नहीं ताक़त से और तादाद से ज़ुल्मों के सौदागर
ख़ुदा लश्कर अबाबीलों का भेजेगा हिजाबों की हिफ़ाज़त में

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जब से तुम सौदागर बन बैठे हो चमकीले तारों के
तब से मैं भी सर्दी की शामों सी जल्दी ढल जाती हूँ

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मेरी क़ीमत लगा रहा है वो
कौड़ियौं में जिसे ख़रीदा था

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कौड़ियों के भाव भी कोई ख़रीदेगा नहीं अब
दे के क़ीमत जान की जिस इश्क़ को मैं ने ख़रीदा

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वक़्त ने हम पे लगाए जाल कितने
जेब में कौड़ी नहीं थी साल कितने

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फूटी कौड़ी भी पास नहीं पर
दिल से तो हम राजा हैं यारों

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घर आते आते सौदागर हो जाऊँ
इतना भी बाज़ार नहीं देखूंगा मैं

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अपने मूल अर्थ में, 'कौड़ी' प्राचीन काल में मुद्रा के रूप में उपयोग किए जाने वाले छोटे शंख को संदर्भित करता है। समय के साथ, यह किसी तुच्छ या बेकार वस्तु का प्रतीक बन गया है, जो अक्सर सादगी और विनम्रता की छवि को उभारता है।

कवि अक्सर 'कौड़ी' का उपयोग विनम्रता और भौतिक संपत्ति की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करने के लिए करते हैं। यह भव्यता के विपरीत है, सादगी में सुंदरता को उजागर करता है। यह उस समय की याद दिला सकता है जब जीवन कम जटिल था।

अपनी सादगी में, 'कौड़ी' एक गहरी काव्यात्मक गूंज रखती है। यह हमें विनम्रता के स्थायी मूल्य और सांसारिक संपत्ति की क्षणभंगुर प्रकृति की याद दिलाती है।