अपनी ज़द के पार नहीं देखूँगा मैं,
देखा तो धिक्कार! नहीं देखूंगा मैं..
उसको बोलूंगा मेरा गुलदस्ता देख,
दुश्मन की तलवार नहीं देखूंगा मैं..
इक तितली से वा'दा है सो गुलशन में,
ग़लती से भी ख़ार नहीं देखूंगा मैं..
छुप जाओ ना कब तक मुझको देखोगे?
बोल दिया ना यार, नहीं देखूंगा मैं..
घर आते आते सौदागर हो जाऊँ,
इतना भी बाज़ार नहीं देखूंगा मैं..
आँखों पे परछाई बनने लगती है,
वहशत में दीवार नहीं देखूंगा मैं..,
'दर्पन' तेरा मन हो तो तू देख मुझे,
तुझको अबकी बार नहीं देखूंगा मैं..
Read Full