Meaning of

ख़ाती

khaati • خاطی

पापी; अपराधी

sinner; wrongdoer

گناہگار; خطاکار

Arabic

मेरी नींदें उड़ा रक्खी है तुम ने
ये कैसे ख़्वाब दिखलाती हो जानाँ

किसी दिन देखना मर जाऊँगा मैं
मेरी क़स
में बहुत खाती हो जानाँ

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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो
कितने सच्चे दिल से झूठी क़स
में खाती हो

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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं

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ख़ातिर से या लिहाज़ से, मैं मान तो गया
झूठी क़सम से, आप का ईमान तो गया

74

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यहाँ मौत का ख़ौफ़ कुछ यूँँ है सब को
कि जीने की ख़ातिर मरे जा रहे हैं

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कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया

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तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना
हमें रोना पड़े, अच्छा लगेगा?

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एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है

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तेरे थोड़ा गिर जाने पर कितना गिर जाते हैं लोग
गिरे हुए लोगों की ख़ातिर गिरना बहुत ज़रूरी है

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जिस की ख़ातिर कितनी रातें सुलगाई
जिस के दुख में दिल जाने क्यूँ रोता है

इक दिन हम सेे पूछ रही थी वो लड़की
प्यार में कोई पागल कैसे होता है

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मेरी नींदें उड़ा रक्खी है तुम ने
ये कैसे ख़्वाब दिखलाती हो जानाँ

किसी दिन देखना मर जाऊँगा मैं
मेरी क़स
में बहुत खाती हो जानाँ

41

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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो
कितने सच्चे दिल से झूठी क़स
में खाती हो

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‘ख़ाती’ शब्द नैतिक विफलता की भावना को जागृत करता है, धर्म के मार्ग से विचलन। कविता में, यह अक्सर अपराधबोध और विवेक के बोझ को दर्शाता है, एक आत्मा की आंतरिक उथल-पुथल को चित्रित करता है जो अपनी गलतियों से अवगत है।

कवि अक्सर ‘ख़ाती’ का उपयोग पश्चाताप और मुक्ति के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह पवित्रता और मासूमियत के शब्दों के विपरीत है, अंधकार से प्रकाश की यात्रा को उजागर करता है। यह शब्द इच्छा और कर्तव्य के बीच संघर्ष को भी उजागर कर सकता है।

कविता के क्षेत्र में, ‘ख़ाती’ मानव स्थिति का दर्पण है, पाप और मुक्ति के बीच के शाश्वत संघर्ष को दर्शाता है।