Meaning of

ख़मों

khamo • خموں

मोड़; घुमाव; वक्र

curves; bends; twists

موڑ; خم; پیچ

Persian

और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह

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ख़मोशी तो यही बतला रही है
उदासी रास मुझ को आ रही है

मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था
वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है

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उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी
ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी

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तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना
वो सोचता है बहुत और बोलता कम है

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चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी

पता नहीं कैसा माहौल था उस के घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी

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दबाती है गला मेरा ख़मोशी
उदासी झाँकती है खिड़कियों से

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ख़मोश झील के पानी में वो उदासी थी
कि दिल भी डूब गया रात माहताब के साथ

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यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का
सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता

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जिन्हें सब लोग गूँगा बोलते हैं
मेरे आगे वो ऊँचा बोलते हैं

ख़मोशी बोलने वालों की सफ़ में
हमीं सब सेे ज़ियादा बोलते हैं

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ज़िन्दगी, यूँँ भी गुज़ारी जा रही है
जैसे, कोई जंग हारी जा रही है

जिस जगह पहले से ज़ख़्मों के निशां थे
फिर वहीं पे चोट मारी जा रही है

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और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह

31

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ख़मोशी तो यही बतला रही है
उदासी रास मुझ को आ रही है

मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था
वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है

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'ख़मों' का मूल अर्थ भौतिक मोड़ या वक्र से है, जो अक्सर प्रकृति या निर्मित वस्तुओं में देखा जाता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि प्राकृतिक दुनिया और मानवीय भावनाओं में पाई जाने वाली तरलता और सुंदरता को व्यक्त किया जा सके।

कवि अक्सर 'ख़मों' का उपयोग नर्तकी की चाल की सुंदरता को वर्णित करने के लिए करते हैं। यह भाग्य के अप्रत्याशित मोड़ों या प्रेम के घुमावदार रास्तों का प्रतीक भी हो सकता है।

कविता में, 'ख़मों' जीवन की सुंदर अप्रत्याशितता का सार पकड़ता है।