Meaning of

खनक

khanak • خنک

झंकार; खनखनाहट; गूंज

tinkle; jingle; resonance

جھنجھناہٹ; کھنکھناہٹ; گونج

Sanskrit

हिज्र का ख़ुनुक-मौसम देर तक नहीं रहता
ज़िन्दगी का ये आलम देर तक नहीं रहता

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जो रख लो मुझ को दिल में तुम
रह लूँगा मैं पागल बनके

तुम मुझ को पहनो पैरों में
मैं खनकूँ फिर पायल बनके

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जब पाँव में पायल खनकती है समुद्री फिर तभी
पूरे धरा-पाताल को हम ने चहकते देखा है

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चूड़ियाँ बेच के वो मेरे लिए लाई 'गिटार'
तार छेड़ूँ तो खनकने की सदा आती है

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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है

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पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे
उस ने मुंडेर फाँदी हो जैसे

छत पे दो पल मिलन जुदाई में
धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे

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याद आई तिरे पैरों की खनकती पायल
आम सा प्रश्न था संगीत किसे कहते हैं

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जब से हाथ की चूड़ी उस की यूँँ खनकती है,
मेरे दिल की धड़कन भी ज़ोर से धड़कती है

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तेरे पायल की ख़ुशबुओं की खनक
धड़कनों को बढ़ाते जाती है

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अगर वो रूठ जाए तो तरीका ये नया करती
कभी कंगन खनकते थे कभी पायल बजा करती

बड़ी मुश्किल से ख़्वाबों को हक़ीक़त में बदलते थे
गली से तब गुज़रता था वो चौखट पर हुआ करती

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हिज्र का ख़ुनुक-मौसम देर तक नहीं रहता
ज़िन्दगी का ये आलम देर तक नहीं रहता

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जो रख लो मुझ को दिल में तुम
रह लूँगा मैं पागल बनके

तुम मुझ को पहनो पैरों में
मैं खनकूँ फिर पायल बनके

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खनक एक कोमल झंकार या खनखनाहट की नाजुक ध्वनि को वहन करता है। मूल रूप से, यह छोटे घंटियों या पायल की ध्वनि को संदर्भित करता है। कविता में, यह क्षणिक आनंद के क्षणों, अस्तित्व की हल्कापन और जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता को पकड़ता है।

पायल की ध्वनि या पत्तियों की कोमल सरसराहट को जागृत करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह अक्सर क्षणिक खुशी या सुंदरता के अस्थायी स्वभाव का प्रतीक है। कवि इसका उपयोग नाजुक अनुग्रह और क्षणभंगुर आनंद के दृश्यों को चित्रित करने के लिए करते हैं।

खनक उन क्षणों का संगीत है जो बहुत जल्दी बीत जाते हैं। यह हमें सबसे संक्षिप्त ध्वनियों में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।