ख़्वाब जितने थे सभी अंबर लगा कर आ गए
हौसले भी ये तभी फिर पर लगा कर आ गए
एक दिन दिल की ज़मीं दो पग में उसने नाप ली
तीसरे पग के लिए हम सर लगाकर आ गए
जिस किसी को भी मोहब्बत में ख़ुदा समझा गया
वो सभी दिल की जगह पत्थर लगाकर आ गए
देख कर और फिर उतर शायद वो मुझको थाम ले
फिर उसी ख़ाली गली चक्कर लगा कर आ गए
तोड़ने तो आ गए हो फल इधर पत्थर लिए
सोचलो गर पेड़ भी ख़ंजर लगा कर आ गए
अब यहाँ उनकी है मर्ज़ी थाम लें या छोड़ दें
हम तो उनके तट पे ही सागर लगा कर आ गए
'दिव्य' देखो शादियों में बिक रही हैं लड़कियाँ
बस उन्हें जो नाम पर अफ़सर लगा कर आ गए
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