ये शब और शब आपस में पूछा करती हैं
क्यूँ तारे टूटे रातें पूछा करती हैं
क्यूँ साथ नहीं वो राहें पूछा करती हैं
फिर आँख मिला कर आहें पूछा करती हैं
तो उनका तकिया बनकर अब कब सोएँगे
हर रात मेरी ये बाँहें पूछा करती हैं
तू बात नहीं करती है मुझ सेे जान-ए-जाँ
पर हाल तेरी ये आँखें पूछा करती हैं
क्या भूल हुई क्यूँ काटा है तुमने हमको
फल फूल शजर और शाख़ें पूछा करती हैं
हाँ अंतिम इच्छा क्या थी मरने वाले की
ये चलती फिरती लाशें पूछा करती हैं
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