आज दिल से कुछ उठा और नैन में कुछ कर गया
जिस तरह से ये समंदर आसमाँ में भर गया
राह में जो रह गया वो फिर कभी लौटा नहीं
खो गया है वो न भटका और न अपने घर गया
इस तरह से जी रहे हैं मर रहे हैं लोग अब
मर के भी कोई अमर, ज़िंदा कोई पर मर गया
आँखें नम थीं हाथ काँपे और खिसकी थी ज़मीं
रुक गया है वक़्त जब से उठ के उसका दर गया
रूठ कर पंछी उड़े पौधे सभी मुरझा गए
गुल इधर खिलता नहीं है जब से वो उठकर गया
इस तरह भी मौत सबको मिल रही है प्यार में
लौट आए पाँव लेकिन देखो तन से सर गया
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