Meaning of

ख़ंदा

khanda • خندہ

मुस्कान; हँसी

smile; laughter

مسکراہٹ; ہنسی

Persian

उन का कारोबार है ये ख़ानदानी
दिल बना कर उस
में पत्थर छोड़ देना

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

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इसी खंडर में कहीं कुछ दिए हैं टूटे हुए
इन्हीं से काम चलाओ बड़ी उदास है रात

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बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल
कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का

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कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई ख़ानदानी दुश्मनी की बात है

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तपता सूरज आजकल किसी को नहीं चाहिए
सभी को हमेशा चाँद की चांदनी चाहिए

मुफ़लिसों से रिश्ता अब रखता नहीं कोई
सब को साथ में आदमी ख़ानदानी चाहिए

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वो होंठों से तो खंडन कर रहे हैं
पर आँखों से निवेदन कर रहे हैं

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"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था

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मुझ को तो दरकार नहीं है समझा कर
पर दिल को इनकार नहीं है समझा कर

बेशक तुम को देख के कुछ कुछ होता है
ऐसा पहली बार नहीं है समझा कर

इमशब तुम को रोक तो लूँ अपने घर में
छत है बस,दीवार नहीं है समझा कर

ख़ंदा-लब वो सब से हँस कर मिलता है
एऐ दिल ये इज़हार नहीं है समझा कर

प्यार व्यार मैं ने सब कर के देख लिया
इन बातों में सार नहीं है समझा कर

बदन मेरे तू तन-आसानी माँग रहा
हिस्से में इतवार नहीं है समझा कर

एक नहीं दो जॉब लगा देते तुम को
‘मौजी’ की सरकार नहीं है समझा कर

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मज़हब-ए-इस्लाम को कर तर्क अपनाओ फ़क़त तुम दीन-हक़ को
फिर दिखाएगा ख़ुदा उस जंग-ए-ख़न्दक़ के ही जैसा मोजिज़ा भी

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उन का कारोबार है ये ख़ानदानी
दिल बना कर उस
में पत्थर छोड़ देना

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

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ख़ंदा एक मुस्कान की कोमलता और हँसी की मधुर ध्वनि को दर्शाता है, जो वातावरण को उज्ज्वल कर देती है। कविता में, यह क्षणिक आनंद और मानवीय संबंधों की गर्माहट को पकड़ता है।

कवि अक्सर ख़ंदा का उपयोग दुःख के बीच खुशी के क्षणों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह आँसुओं के विपरीत है, जो मानवीय भावनाओं की द्वैतता को उजागर करता है। यह मासूमियत और पवित्रता का प्रतीक भी हो सकता है।

ख़ंदा छायाओं के भीतर के प्रकाश की कोमल याद दिलाता है। यह मानव आत्मा की दृढ़ता को दर्शाता है।