मुझको तो दरकार नहीं है समझा कर
पर दिल को इनकार नहीं है समझा कर
बेशक तुमको देख के कुछ कुछ होता है
ऐसा पहली बार नहीं है समझा कर
इमशब तुमको रोक तो लूँ अपने घर में
छत है बस,दीवार नहीं है समझा कर
ख़ंदा-लब वो सब से हँस कर मिलता है
एऐ दिल ये इज़हार नहीं है समझा कर
प्यार व्यार मैंने सब करके देख लिया
इन बातों में सार नहीं है समझा कर
बदन मेरे तू तन-आसानी माँग रहा
हिस्से में इतवार नहीं है समझा कर
एक नहीं दो जॉब लगा देते तुमको
‘मौजी’ की सरकार नहीं है समझा कर
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