mujhko to darkaar nahin hai samjha kar | मुझको तो दरकार नहीं है समझा कर

  - Manmauji

मुझको तो दरकार नहीं है समझा कर
पर दिल को इनकार नहीं है समझा कर

बेशक तुमको देख के कुछ कुछ होता है
ऐसा पहली बार नहीं है समझा कर

इमशब तुमको रोक तो लूँ अपने घर में
छत है बस,दीवार नहीं है समझा कर

ख़ंदा-लब वो सब से हँस कर मिलता है
एऐ दिल ये इज़हार नहीं है समझा कर

प्यार व्यार मैंने सब करके देख लिया
इन बातों में सार नहीं है समझा कर

बदन मेरे तू तन-आसानी माँग रहा
हिस्से में इतवार नहीं है समझा कर

एक नहीं दो जॉब लगा देते तुमको
‘मौजी’ की सरकार नहीं है समझा कर

  - Manmauji

Izhar Shayari

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