तेरे बग़ैर मेरा गुज़ारा नहीं है दोस्त
आ लौट आ कि दूसरा चारा नहीं है दोस्त
कश्ती-ए-ज़ीस्त फँस गई गिर्दाब में मेरी
और इर्द-गिर्द कोई किनारा नहीं है दोस्त
फ़ेहरिस्त-ए-यार यूँ तो बहुत है तवील पर
तू चाँद है फ़लक का सितारा नहीं है दोस्त
मीलों की दूरियों पे तो समझा लिया इसे
दिल को दिलों की दूरी गवारा नहीं है दोस्त
— Manmauji















