हम पी के सो गए कभी जग कर शराब पी
जाँ हमने तेरी याद में अक्सर शराब पी
यारों ने भी ये कह के मुझे बरगला लिया
चल ना हमारे साथ भी चल कर शराब पी
बरसों पुराना मैक़दे में मिल गया अदू
अपने सुबू से उसको पिला कर शराब पी
नासूर दिल के देख तबीबों ने ये कहा
है बस यही इलाज बराबर शराब पी
इक शाम मौत आ के बदन से गई लिपट
शब भर का वक़्त माँग के जी भर शराब पी
ज़ाया'' नहीं किया गया बर्बादियों को भी
बर्बादियों का सोग मना कर शराब पी
नाकामियों ने कर दिया दो-राह पर खड़ा
मौजी को ज़हर भी था मुयस्सर शराब पी
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