ham pee ke so ga.e kabhi jag kar sharaab pee | हम पी के सो गए कभी जग कर शराब पी

  - Manmauji

हम पी के सो गए कभी जग कर शराब पी
जाँ हमने तेरी याद में अक्सर शराब पी

यारों ने भी ये कह के मुझे बरगला लिया
चल ना हमारे साथ भी चल कर शराब पी

बरसों पुराना मैक़दे में मिल गया अदू
अपने सुबू से उसको पिला कर शराब पी

नासूर दिल के देख तबीबों ने ये कहा
है बस यही इलाज बराबर शराब पी

इक शाम मौत आ के बदन से गई लिपट
शब भर का वक़्त माँग के जी भर शराब पी

ज़ाया'' नहीं किया गया बर्बादियों को भी
बर्बादियों का सोग मना कर शराब पी

नाकामियों ने कर दिया दो-राह पर खड़ा
मौजी को ज़हर भी था मुयस्सर शराब पी

  - Manmauji

Badan Shayari

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