तू माँ है बहन है तू बेटी है नारी
ये सृष्टि तुम्हीं से है सारी की सारी
है तर्पण समर्पण अलंकार तेरे
जटा से तभी शिव ने भू पर उतारी
नहीं कोई शक्ति का पर्याय तुम सा
मगर आदमी की कुदृष्टि से हारी
उरस्थल का तेरे ये प्रारब्ध कैसा
तेरा दूध बन बैठा तेरा शिकारी
उठो मानवी रण की भेरी बजा दो
विजय हो तुम्हारी विजय हो तुम्हारी
— Manmauji















