Meaning of

ख़ता

khata • غلطیاں

गलती; त्रुटि; दोष

mistake; error; fault

غلطی; خطا; قصور

Arabic

कि जैसे चाँद निकलेगा यहीं से
मैं ऐसे एक खिड़की देखता हूँ

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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

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जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई
पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?

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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया
पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया

सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा
तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया

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ये गूँगों की महफ़िल है निकलना ही पड़ेगा
क्या इतनी ख़ता कम है कि हम बोल पड़े हैं

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मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ
काश पूछो कि मुद्दआ' क्या है

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घड़ी पर हाथ रख लेता था मैं, जब
तू मुझ को देखता था मुस्कुरा के

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इस तरह करता है हर शख़्स सफ़र अपना ख़त्म
ख़ुद को तस्वीर में रखता है चला जाता है

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ये तो कहिए इस ख़ता की क्या सज़ा
मैं जो कह दूँ आप पर मरता हूँ मैं

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वो मेरा जब न हो सका तो फिर यही सज़ा रहे
किसी को प्यार जब करूँँ वो छुप के देखता रहे

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कि जैसे चाँद निकलेगा यहीं से
मैं ऐसे एक खिड़की देखता हूँ

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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

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अपने मूल अर्थ में, 'ख़ता' गलती या त्रुटि को संदर्भित करता है, जो सही या अपेक्षित से विचलन है। कविता में, यह शब्द अक्सर मानवीय त्रुटि का भार वहन करता है, हमारी अपूर्ण प्रकृति की एक कोमल स्वीकृति।

'ख़ता' का उपयोग कवि अक्सर क्षमा और मोचन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी की चूक या जीवन की अनिवार्य त्रुटियों के विचार को जागृत कर सकता है। यह शब्द 'गुनाह' के विपरीत है, जो एक अधिक जानबूझकर पाप को दर्शाता है।

कविता में, 'ख़ता' हमारी साझा मानवता का प्रतिबिंब बन जाता है। यह अपूर्णता में सुंदरता की एक कोमल याद दिलाता है।