Meaning of

ख़िरद

khird • خرد

बुद्धि; विवेक

intellect; wisdom

عقل; دانش

Arabic

ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने
अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने

जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब
हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने

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ये ख़राबातियान-ए-ख़िरद-बाख़्ता
सुब्ह होते ही सब काम पर जाएँगे

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हाए वो भीगा रेशमी पैकर
तौलिया खुरदुरा लगे जिस को

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कभी ख़िरद कभी दीवानगी ने लूट लिया
तरह तरह से हमें ज़िंदगी ने लूट लिया

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जहल-ए-ख़िरद ने दिन ये दिखाए
घट गए इंसाँ बढ़ गए साए

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हाए हैरत है ज़माने ने तुझे क्या समझा
एक आदम से निकाली हुई हव्वा समझा

सब समझते हैं तुझे बिंत-ए-फलाँ या ज़ोहजा
फिर भी ईसा को ख़ुदा ने तेरा बेटा समझा

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तुम को मैं बा-ख़िरद समझता था
तुम तो अच्छा सा मशवरा देते

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ख़िरद ने दी जो दबिश मेरे दफ़्तरे-दिल पर
तेरा ख़याल मिला है मेरे ठिकानों से

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चश्म-ए-पुर-नम में बाद-ए-हिज्र शजर
लश्कर-ए-ख़्वाब ग़र्क़ होने लगे

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ज़िन्दगी भर यही इक काम किया है मैं ने
अपने दुख दर्द को नीलाम किया है मैं ने

जुर्म समझा है जिसे अहले-ख़िरद ने शादाब
हाँ वही जुर्म सरे-आम किया है मैं ने

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ये ख़राबातियान-ए-ख़िरद-बाख़्ता
सुब्ह होते ही सब काम पर जाएँगे

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ख़िरद बुद्धि और विवेक का सार है, जो मानव विचारों की भूलभुलैया में एक मार्गदर्शक प्रकाश की तरह है। कविता में, यह अक्सर अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर आंतरिक स्पष्टता और सत्य की खोज का प्रतीक बन जाता है।

कवि अक्सर ख़िरद का आह्वान करते हैं ताकि वे ज्ञान और आत्म-खोज के विषयों का अन्वेषण कर सकें। यह अज्ञानता और मूर्खता के विपरीत होता है, और उन लोगों के लिए एक प्रकाशस्तंभ के रूप में कार्य करता है जो ज्ञान की खोज में हैं।

ख़िरद काव्यात्मक परिदृश्य में एक शाश्वत प्रकाशस्तंभ है, जो ज्ञान और सत्य की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।