Meaning of

खिज़ां

khizan • کھوکھلا

पतझड़; पतन; क्षय

autumn; decline; decay

خزاں; زوال; بوسیدگی

Persian

ग़ज़ल किताब तसव्वुर ख़िज़ाँ अकेलापन
मिरे नसीब में कितनी अजीब चीज़ें हैं

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ख़िज़ाँ को आता है कैसे बहार कर लेना
लहू के छींटो से काँटो को प्यार कर लेना

वो जो भी कह रहा है सच ही कह रहा होगा
हमारा काम है बस ऐतिबार कर लेना

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वो इक नदी जो कभी तेज़-तेज़ बहती थी
वो आज रेत के मैदान सी बिछी हुई है

मैं इक दरख़्त था 'अशरफ़' किसी ज़माने में
खिज़ां के कहरस अब ठूँठ ही बची हुई है

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कहो कि ये ख़िज़ाँ नहीं कहो कि ये बहार है
नज़र नज़र का खेल है नज़र का ही ये वार है

ख़ुदा भरेगा क़िस्त को ये टूटे दिल ख़रीदकर
ये इश्क़ की कहानियाँ उसी पे सब उधार है

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खा गई ग़म की ख़िज़ाँ उन को मुज़फ़्फ़रपूर में
इश़्क के पौधे कभी जो थे उगाये मैं ने

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वो मुझ सेे रूठ जाती है तो दिल मेरा ये कहता है
ख़िज़ाँ के बा'द आएँगी बहारें लौट कर इक दिन

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कि हस्ब-ए-काएनात में जो मुस्कुरा रहा हूँ मैं
ख़िज़ाँ में जैसे गुल खिला है मौसम-ए-बहार का

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अचानक से चले जाते हैं जो कुछ लोग
बहारों में ख़िज़ाँ को छोड़ जाते हैं

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ग़ज़ल किताब तसव्वुर ख़िज़ाँ अकेलापन
मिरे नसीब में कितनी अजीब चीज़ें हैं

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ख़िज़ाँ को आता है कैसे बहार कर लेना
लहू के छींटो से काँटो को प्यार कर लेना

वो जो भी कह रहा है सच ही कह रहा होगा
हमारा काम है बस ऐतिबार कर लेना

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खिज़ां पतझड़ की छवि प्रस्तुत करता है, जब प्रकृति अपनी जीवंतता को छोड़कर पतन के चरण में प्रवेश करती है। कविता में, यह अक्सर अपरिहार्य क्षय और समय के बीतने का प्रतीक है, जो उदासी और स्मृति को जागृत करता है।

कवि खिज़ां का उपयोग जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति पर विचार करने के लिए करते हैं। यह बुढ़ापे, हानि और परिवर्तन की खट्टे-मीठे सौंदर्य के लिए एक रूपक है।

खिज़ां हमें अंत की सुंदरता की याद दिलाता है, जीवन के चक्रों को अपनाने के लिए एक कोमल प्रेरणा।