Meaning of

ख़ोर

khor • خور

सूरज; धूप; पूरब

sun; sunlight; east

سورج; دھوپ; مشرق

Persian

सर नेम ख़ानदान की पहचान बन गया
जितने भी मुफ़्तख़ोर थे मग़रूर हो गए

कुछ लोग ख़ानदान से जूझे तमाम उम्र
कुछ लोग ख़ानदान से मशहूर हो गए

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एक दिन की ख़ुराक है मेरी
आप के हैं जो पूरे साल के दुख

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काँटा सा जो चुभा था वो लौ दे गया है क्या
घुलता हुआ लहू में ये ख़ुर्शीद सा है क्या

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एक दिन बनेंगे ख़ाक हम
मिट्टी की हैं खुराक हम

भीतर ख़लाए साथ है
बाहरस ठीक-ठाक हम

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दरिया की गहराई गोताखोर बताएगा
ज़िंदा रहना है जिस को और डूबने जाता है

प्रेम की पीड़ा पूछो तो उस प्रेमी से पूछो
पूरे मन से जो फिर आधा प्रेम निभाता हैं

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हाथ के छालों को हक़ मिलता ज़माने में कहाँ
चापलूसी ही मलाई मारती है बस यहाँ

किस्मतों पर पड़ गए ताले हैं मेहनतकश के अब
बस चुग़ल-ख़ोरों के क़ाबू में है ये सारा जहाँ

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मैं सब कुछ जानता हूँ आप के बारे में बर-ख़ुर्दार
बहुत डर जाते हैं वो जब भी मैं ये बात कहता हूँ

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मेरे रुख़सार से ज़ुल्फ़ों को वो जब जब हटाता है
वो कहता है नज़र उस को मह-ए-ख़ुर्शीद आता है

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क्यूँँ इंतिहा-ए-होश को कहते हैं बे-ख़ुदी
ख़ुर्शीद ही की आख़िरी मंज़िल तो रात है

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ख़ुर्शीद-ओ-माहताब-ओ-सितारों की अंजुमन
सब फीके पड़ गए तेरे चेहरे के सामने

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सर नेम ख़ानदान की पहचान बन गया
जितने भी मुफ़्तख़ोर थे मग़रूर हो गए

कुछ लोग ख़ानदान से जूझे तमाम उम्र
कुछ लोग ख़ानदान से मशहूर हो गए

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एक दिन की ख़ुराक है मेरी
आप के हैं जो पूरे साल के दुख

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ख़ोर सूरज की चमक और गर्मी को दर्शाता है, जो दिन का संचालन करता है। कविता में, यह अक्सर ज्ञान, आशा और समय के प्रवाह का प्रतीक होता है, जो दुनिया पर अपनी सुनहरी आभा बिखेरता है।

'ख़ोर' का उपयोग कवि नई शुरुआत की सुबह, प्रेम की गर्मी, या समय के अनिवार्य प्रवाह को दर्शाने के लिए करते हैं। यह रात की ठंडक के विपरीत जीवन और स्पष्टता लाता है।

ख़ोर काव्यिक क्षेत्र में प्रकाश का एक दीपक है, जो भावनाओं और विचारों को गर्मी और स्पष्टता की ओर ले जाता है।