Meaning of

ख़्वाब-ओ-ख़्याल

khwaab-o-khyaal • خواب و خیال

सपने और विचार; कल्पना

dreams and thoughts; imagination

خواب اور خیالات; تصور

Persian

हम सेे सीखो कमाल में रहना
हिज्र में भी विसाल में रहना

होश में सबके साथ रह कर भी
उस के ख़्वाब-ओ-ख़याल में रहना

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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह

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दिल जिन को ढूँढ़ता है न-जाने कहाँ गए
ख़्वाब-ओ-ख़याल से वो ज़माने कहाँ गए

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ऐ ग़में हिज्रां यूँँ रह रह के जलाओ न मुझे
वक़्त गुजरा तू भी आ आ के सताओ न मुझे

चैन से जीने दे मुझ को ओ मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल
मिट चुकी कब की सुनो ऐसे मिटाओ न मुझे

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तुम अपनी बात पे क़ाएम हो आख़िरी दम तक
हटाओ छोड़ो ये ख़्वाब-ओ-ख़याल की बातें

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अब इस तरह हमारी मुलाक़ात होती है,
ख़्वाब-ओ-ख़यालों में ही फ़क़त बात होती है

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अब इस तरह हमारी मुलाक़ात होती है,
ख़्वाब-ओ-ख़यालों में ही फ़क़त बात होती है

दीदार वास्ते वो चले आते ख़्वाबों में,
हर रात उन की इतनी 'इनायात होती है

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हम सेे सीखो कमाल में रहना
हिज्र में भी विसाल में रहना

होश में सबके साथ रह कर भी
उस के ख़्वाब-ओ-ख़याल में रहना

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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह

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'ख़्वाब-ओ-ख़्याल' एक ऐसी दुनिया को जागृत करता है जहाँ सपने और विचार आपस में मिलकर कल्पना की एक बुनावट बनाते हैं। कविता में, यह अक्सर वास्तविकता से परे एक क्षेत्र का सुझाव देता है, जहाँ मन स्वतंत्र रूप से भटकता है, ठोस दुनिया की सीमाओं से मुक्त।

कवि 'ख़्वाब-ओ-ख़्याल' का उपयोग अमूर्त में गहराई से जाने के लिए करते हैं, वास्तविकता और कल्पना के बीच की सीमाओं की खोज करते हैं। यह एक लालसा या स्मृति का भाव जगा सकता है, क्योंकि सपने अक्सर अधूरी इच्छाओं को दर्शाते हैं।

काव्यात्मक परिदृश्य में, 'ख़्वाब-ओ-ख़्याल' हमें मन के गलियारों में भटकने के लिए आमंत्रित करता है, जहाँ वास्तविकता और कल्पना सामंजस्य में नृत्य करते हैं।