Meaning of

जान-ए-वफ़ा

kyoon • جان وفا

वफ़ादारी का प्रिय; निष्ठा का सार

beloved of fidelity; essence of loyalty

وفاداری کا پیارا; وفا کا جوہر

Persian

क्या पता क्यूँ समझ नहीं आता
क्यूँँ तेरा हूँ समझ नहीं आता

जब तुझे साथ ही नहीं रहना
फिर गिला क्यूँ समझ नहीं आता

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वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ
बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ

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देखिए होगा श्री-कृष्ण का दर्शन क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग में दिल गोपियों का है बेकल

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हम ने फ़ुर्क़त के बा'द जान-ए-वफ़ा
रातें सब जाग कर गुज़ारी हैं

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जिगर के ख़ून की बूंदों को यक जा कर के शजर
तमाम रात में इक कहक़हा बनाया गया

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जान-ए-जाँ जान-ए-वफ़ा जान-ए-जिगर जान-ए-हज़ी
जान-ए-मन जान-ए-तमन्ना तेरी आँखों के निसार

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सामना मेरा तो होना है कफ़न से इक दिन
क्यूँ ये फिर मौत मुझे रोज़ मिला करती है

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किसी को राज़-ए-दिल अपना बताऊॅं भी तो आख़िर क्यूँ
ज़माना सुन तो सकता है समझ लेकिन नहीं सकता

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हम सेे ये फूल ले के जान-ए-वफ़ा
बर सर-ए-रोज़गार कर दो हमें

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वैसे तो दर-ब-दर नहीं हूँ मैं
इतना भी बे-असर नहीं हूँ मैं

सोचता हूँ तुझे तो लगता है
क्यूँ तेरा हम सफ़र नहीं हूँ मैं

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क्या पता क्यूँ समझ नहीं आता
क्यूँँ तेरा हूँ समझ नहीं आता

जब तुझे साथ ही नहीं रहना
फिर गिला क्यूँ समझ नहीं आता

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वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ
बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ

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'जान-ए-वफ़ा' अपने मूल अर्थ में उस प्रिय की छवि प्रस्तुत करता है जो वफ़ादारी और निष्ठा का प्रतीक है। कविता ने इस भावना को और गहराई दी है, इसे अटल समर्पण और प्रेम के आदर्श के रूप में बदल दिया है जो समय और परीक्षाओं से परे है।

कवि अक्सर 'जान-ए-वफ़ा' का उपयोग उस प्रेमी का वर्णन करने के लिए करते हैं जिसकी वफ़ादारी अडिग है। यह क्षणिक प्रेम के विपरीत, एक स्थायी प्रेम को उजागर करता है। यह शब्द शाश्वत बंधन और सच्चे प्रेम की पवित्रता का आभास देता है।

'जान-ए-वफ़ा' उस प्रेम का सार प्रस्तुत करता है जो क्षणिकता से परे है। यह अटल समर्पण की शक्ति का प्रमाण है।