Meaning of

लर्ज़ा

larza • لرزہ

कंपन; थरथराहट; काँपना

tremor; shiver; quiver

لرزش; کپکپاہٹ; کانپنا

Persian

ऐ दिल-ए-लर्ज़ां ठहर थोड़ा सुकून-ए-जाँ में आ
बीते वक़्तों की मुहब्बत को ज़रा तू याद कर

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दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए

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इन लरज़ते लबों से क्यूँँ तू ने
सुर्ख़ आँखों को फिर छुआ ही नहीं

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मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़

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मेरा उस को जब चूमने का हुआ मन
वो लरजा के बोली इजाज़त मुझे है

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सफ़र के वक़्त वो मुझ को सवार करते हुए
लरज़ते होंठों से बोली 'शजर' ख़ुदा हाफ़िज़

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शम्स पर कोहरे की थोड़ी गर्द है
धूप है मद्धम सी मौसम सर्द है

शाख़ पर ये कैफ़ियत है फूल की
जिस्म में लर्ज़ा है चेहरा ज़र्द है

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ऐ दिल-ए-लर्ज़ां ठहर थोड़ा सुकून-ए-जाँ में आ
बीते वक़्तों की मुहब्बत को ज़रा तू याद कर

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दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए

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'लर्ज़ा' शारीरिक कंपकंपी का भाव व्यक्त करता है, अक्सर ठंड या डर के कारण। कविता में, यह कमजोरी और ताकत के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है, वह क्षण जब दिल भावनाओं से कांपता है।

कवि 'लर्ज़ा' का उपयोग मानव भावनाओं की नाजुकता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी के दिल की थरथराहट या किसी महत्वपूर्ण घटना से पहले की प्रत्याशा की कंपकंपी का वर्णन कर सकता है।

'लर्ज़ा' की थरथराहट में, कविता जीवन के कोमल क्षणों की धड़कन पाती है, जहाँ ताकत और कमजोरी साथ-साथ नृत्य करते हैं।