शम्स पर कोहरे की थोड़ी गर्द हैधूप है मद्धम सी मौसम सर्द हैशाख़ पर ये कैफ़ियत है फूल कीजिस्म में लर्ज़ा है चेहरा ज़र्द है— Shajar Abbas