Meaning of

महज़

mahj • محض

केवल; मात्र; सिर्फ़

mere; only; just

صرف; محض; فقط

Arabic

जिस के संग सफ़र तय करने की आरज़ूू थी मुझे
वो नाविक महज़ काग़ज़ की क़श्ती पर सवार था

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यूँँ कहें नुमाइशों के दिन क़रीब आ गए
महज़ फ़रवरी हो किस तरह महीना इश्क़ का

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तेरा पीछा करते करते जाने क्यूँ
मैं दुनियादारी से पीछे छूट गया

तू ने तो ऐ जान महज़ दिल तोड़ा था
तू क्या जाने मैं अंदर तक टूट गया

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उसे क्या ही पता होगा इबादत किस को कहते है
मुझे पूछा जो करती थी मोहब्बत किस को कहते है

सभी वादें सभी क़स
में सनम निकले महज़ क़िस्से
तसव्वुर से मैं ने सीखा हक़ीक़त किस को कहते है

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कभी शीशा, कभी कंघी, कभी चद्दर बदलना था
रहे थे साथ जिन
में भी वो सब मंज़र बदलना था

तुम्हारे बा'द में हमनें यहाँ क्या-क्या नहीं बदला
तुम्हारा क्या था तुम को तो महज़ नंबर बदलना था

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रूप और रंग, ये वक़्त सब ले गया
महज़ तस्वीर और आइना रह गया

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महज़ तस्वीर देख लगता है
जैसे जाँ तुम क़रीब बैठी हो

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महज़ इक ख़्वाब बनकर रह गई तुम
हक़ीक़त में तुम्हें सब चाहते थे

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ज़हर खा खा कर गुज़ारा कर रहे हैं आजकल
ज़िंदगी तुझ सेे किनारा कर रहे हैं आजकल

तू बहुत ही दिलनशीं है, महजबीं है तू मगर
तुझ को अपनाकर ख़सारा कर रहे हैं आजकल

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ग़ज़ब हिम्मत सुब्ह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उस सेे महज़ सपना समझती है

सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुम ने कयामत है
क़सम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है

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जिस के संग सफ़र तय करने की आरज़ूू थी मुझे
वो नाविक महज़ काग़ज़ की क़श्ती पर सवार था

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यूँँ कहें नुमाइशों के दिन क़रीब आ गए
महज़ फ़रवरी हो किस तरह महीना इश्क़ का

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'महज़' का मूल अर्थ किसी चीज़ के केवल वही होने का है, जो वह है, बिना किसी अतिरिक्तता या अलंकरण के। कविता में, यह शब्द अक्सर सादगी या स्पष्टता की भावना को गहराई देता है, विषय के सार को बिना किसी विचलन के उजागर करता है।

'महज़' का उपयोग कवि किसी भावना या वस्तु की शुद्धता या एकता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अधिक जटिल या परतदार अवधारणाओं के विपरीत होता है, जिससे मूल सत्य या भावना पर ध्यान केंद्रित होता है।

कविता में, 'महज़' हमें सादगी में सुंदरता देखने के लिए आमंत्रित करता है। यह हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी, सार ही पर्याप्त होता है।