Meaning of

मक़ाल

maqaal • مقال

लेख; प्रवचन; निबंध

article; discourse; essay

مضمون; خطبہ; مقالہ

Arabic

रुख़-ए-निगाह-ए-आतिशा से कलाम कर के आ रहे हैं
हम उन निगाहों को सर-ए-रह सलाम कर के आ रहे हैं

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ग़ैर क्या देंगें मेरे बारे में
तुझ को बस बद-गुमानियांँ देंगें

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जैसे जैसे बढ़ेंगे इश्क़ के दिन
और ज़्यादा ये सख़्तियाँ देंगें

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दर्द देंगें अज़ाब देंगें वो
और क्या हम को वो मियाँ देंगें

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देंगें ये अहले जुर्म को राहत
बे कुसूरों को फाँसियाँ देंगें

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कभी भी सिद्क़-ए-मक़ाल, अक़्ल-ए-हलाल के बिन
क़बूल कोई दुआ, नहीं हो सकेगी साहब

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क़त्ल में मेरे कौन था शामिल
इश्क़, सिद्क़-ए-मक़ाल या कि वफ़ा

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रुख़-ए-निगाह-ए-आतिशा से कलाम कर के आ रहे हैं
हम उन निगाहों को सर-ए-रह सलाम कर के आ रहे हैं

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ग़ैर क्या देंगें मेरे बारे में
तुझ को बस बद-गुमानियांँ देंगें

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'मक़ाल' शब्द एक संरचित अभिव्यक्ति का सार लिए हुए है, जो विचारों को स्पष्टता और गहराई के साथ व्यक्त करता है। कविता में, यह एक गहन प्रवचन का माध्यम बन जाता है, जहाँ गद्य और पद्य की सीमाएँ धुंधली हो जाती हैं, और कवि जटिल विषयों को सुंदरता के साथ खोजता है।

कवि अक्सर 'मक़ाल' का उपयोग दार्शनिक विचारों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह ठोस और अमूर्त के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है, जिससे अस्तित्व संबंधी प्रश्नों की खोज की जा सकती है। यह शब्द सरल अभिव्यक्तियों के विपरीत भी हो सकता है, विचार की गहराई को उजागर करता है।

'मक़ाल' पाठक को बौद्धिक अन्वेषण के क्षेत्र में आमंत्रित करता है, जहाँ शब्द गहन अंतर्दृष्टि के वाहक बन जाते हैं।