Meaning of

मरीज़-ए-इश्क़

mareez-e-ishq • مریض عشق

प्रेम का रोगी; प्रेम में पीड़ित प्रेमी

patient of love; lover suffering from love

محبت کا مریض; عشق میں مبتلا عاشق

Persian

अभी तुम ने मेरी बदमाशियाँ देखी कहाँ है
मरीज़-ए-इश्क़ की गुस्ताख़ियाँ देखी कहाँ है

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मरीज़-ए-इश्क़ हूँ दीदार-ए-यार काफ़ी है
मिलेगा दीद से जो भी क़रार काफ़ी है

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ज़र से परे बस एक दुआ ढूँढ़ते हुए
आया मरीज़-ए-इश्क़ दवा ढूँढ़ते हुए

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किसी भी डॉक्टर से लो नसीहत या हकीमों से
अगर मेरा मरीज़-ए-इश्क़ है तो मैं शिफ़ा दूँगा

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न हम आबाद कहते हैं, न हम बर्बाद कहते हैं
उसे जो कि मरीज़-ए-इश्क़ है, फ़रहाद कहते हैं

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मरीज़-ए- इश्क़ से उस का हाल मत पूछा करो तुम
तबस्सुम लब-कुशा लहजा, झूठ होगा ठीक ही हूँ

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मरीज़-ए-इश्क़ तेरा हूँ इलाज-ए-इश्क़ तुझ सेे हो
पराई ओक से ले लूँ दवा प्यासा नहीं हूँ मैं

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अभी तुम ने मेरी बदमाशियाँ देखी कहाँ है
मरीज़-ए-इश्क़ की गुस्ताख़ियाँ देखी कहाँ है

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मरीज़-ए-इश्क़ हूँ दीदार-ए-यार काफ़ी है
मिलेगा दीद से जो भी क़रार काफ़ी है

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‘मरीज़-ए-इश्क़’ एक ऐसे प्रेमी की छवि प्रस्तुत करता है जो प्रेम में इतना डूबा हुआ है कि वह एक रोग बन जाता है। कविता में यह रोग केवल शारीरिक या मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि एक गहरी भावनात्मक अनुभूति है जो साधारण पीड़ा से परे है।

कवि अक्सर 'मरीज़-ए-इश्क़' का उपयोग अप्राप्त प्रेम, वियोग की पीड़ा और जुनून की भस्मकारी प्रकृति की खोज के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो आनंदमय प्रेम को दर्शाते हैं, गहरे स्नेह में निहित पीड़ा को उजागर करते हैं।

कविता की दुनिया में, 'मरीज़-ए-इश्क़' प्रेम की सुंदरता और उसकी अंतर्निहित पीड़ा के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है।