Meaning of

मौज-ए

mauj-e • موج

लहर; तरंग

wave; surge

لہر; موج

Persian

ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता

मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता

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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

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रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए

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कौन सी दीवार है मौजूद इस रिश्ते में 'साज़'
क्यूँँ नहीं रो सकते हम अपने पिता के सामने

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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है तरावत मौज-ए-कौसर की

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लब-ए-दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली का
भँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में

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कुछ इमोजी वॉलपेपर पर पड़े रह जाएँगे
फ़ोन से जितना मिटा लो चाहे मेरी चैट को

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जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है
उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है

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बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना
किनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते

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ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या
हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते

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ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता

मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता

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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है

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मूल रूप से 'मौज' पानी की प्राकृतिक उठान और गिरावट को दर्शाता है, जो गति और तरलता के सार को पकड़ता है। कविता ने इस शब्द को भावनाओं के उतार-चढ़ाव, जीवन की लहराती यात्रा, और प्रकृति के लयबद्ध नृत्य का प्रतीक बनाने के लिए अपनाया है।

'मौज' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम की उथल-पुथल भरी प्रकृति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जुनून की अप्रत्याशित लहरों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह स्थिरता के विपरीत है, जीवन के गतिशील सार को उजागर करता है।

मौज जीवन की निरंतर गति का सार पकड़ता है, परिवर्तन में सुंदरता की याद दिलाता है।