Meaning of

मिस्रे

misre • مصرے

शेर; काव्य पंक्तियाँ

verses; poetic lines

مصرے; شعری سطریں

Arabic

नैना हैं दोहे के मिसरे
सूरत है ग़ज़लों सी उस की

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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ
अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ

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अब तो इक मिसरे को ले कर हफ़्तों बैठे रहते हैं
पहले तेरी इक तस्वीर पे दो नज़्में हो जाती थीं

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देखो तो बात इस में जहाँ भर की है निहाँ
वरना तो कुछ नहीं है दो मिसरे की बात है

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मेरे मिसरे मेरी बातें उलट-पुलट कर पढ़ते हैं
आज तमाम इन नक़्कालों को नज़्र करूँँगा अपना शे'र

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यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई
बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं

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आ के नज़दीक मुँह न फेर ग़ज़ल
पास आ बैठ थोड़ी देर ग़ज़ल

सब तेरे नूर से चमकते हैं
लफ़्ज़ मिसरे ख़याल शे'र ग़ज़ल

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अधूरे ज़ीस्त के मिसरे ग़ज़ल कोई अधूरी सी
क़वाफ़ी से बदलते तुम मेरी फ़ितरत रदीफ़ों सी

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जी लगाई है मैं ने ये गंदी आदत इन सभी को
जो ये मेरे दोस्त सब मिसरों पे मिसरे मारते हैं

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मुकम्मल शे'र होता ही नहीं है एक मिसरे से
मेरा होना ज़रूरी है तेरा होना ज़रूरी है

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नैना हैं दोहे के मिसरे
सूरत है ग़ज़लों सी उस की

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ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ
अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ

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मिस्रे कविता की व्यक्तिगत पंक्तियों को संदर्भित करता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना भार और लय होता है। कविता में, यह अभिव्यक्ति की आधारशिला है, जहाँ प्रत्येक पंक्ति अर्थ और भावना के समग्र ताने-बाने में योगदान करती है।

कवि 'मिस्रे' का उपयोग अपने कार्य के जटिल पैटर्न को गढ़ने के लिए करते हैं। प्रत्येक पंक्ति कविता के ताने-बाने में एक धागा होती है, जो एक सुसंगत और गूंजने वाले संपूर्ण को बनाने के लिए एक साथ बुनती है।

मिस्रे कविता की धड़कन हैं, प्रत्येक धड़कन शेर के जीवन में जोड़ती है।