Meaning of

मृत

mrit • مردہ

मृत; निर्जीव

dead; lifeless

مردہ; بے جان

Sanskrit

किसी साहिर को मैं भी चाहती हूँ
मेरे अंदर भी कोई अमृता है

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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं

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जो न खेली होली 'अमृत' के साथ में
हाथों में दीवाली तक गुलाल रहेगा

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पेट में दाना नहीं उपवास ले कर क्या करें
मर चुके प्यासे परिंदे प्यास ले कर क्या करें

सार्वभौमिक सत्य है ये मृत्यु का आना है तय
मछलियाँ बगुलों से फिर विश्वास ले कर क्या करें

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तुम मेरे वो लगते हो जो कोई नइँ
हो गई मैं अमृता सी प्यार में

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ख़ुद-कुशी करने में भी नाकाम रह जाते हैं हम
कौन अमृत घोल देता है हमारे ज़हर में

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कुछ लोगों से यूँँ रिश्ता मेरा
जैसे छत का है दीवारों से

कल मरने वाला तो आज मरे
मुर्दा बेहतर है बीमारों से

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वो बेटे मुर्दो में गिने जाए ख़ुदा
माँ बाप अकेले जिन के जाते अस्पताल

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अलावा शिव के विष कोई नहीं पीता
सभी अमृत के प्यासे देव या दानव

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आप का अक्स मुझ
में अमृत था
आप का हिज्र दिल पे आरी है

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किसी साहिर को मैं भी चाहती हूँ
मेरे अंदर भी कोई अमृता है

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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं

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यह शब्द जीवन की अनुपस्थिति को व्यक्त करता है, एक स्थिरता जो अंतिम और गहन दोनों है। कविता में, यह अक्सर यात्रा के अंत या उथल-पुथल के बाद की शांति का प्रतीक होता है।

कवि इस शब्द का उपयोग मृत्यु और समय के अनिवार्य प्रवाह के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति और स्वीकृति में मिलने वाली शांति पर विचार कर सकता है।

कविता में, 'मृत' जीवन के क्षणभंगुर क्षणों और स्वीकृति के बाद की शांति की याद दिलाता है।