Meaning of

मुख़्तलिफ़

mukhtalif • مختلف

विभिन्न; अलग

different; various

مختلف; جدا

Arabic

ख़ूब-सूरत और भी हैं इस जहाँ में लड़कियाँ
तुम मगर हो जान-ए-जाँ सब लड़कियों से मुख़्तलिफ़

6

Download Image

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं
जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला

43

Download Image

सुनते हैं इश्क़ नाम के गुज़रे हैं इक बुज़ुर्ग
हम लोग भी फ़क़ीर इसी सिलसिले के हैं

32

Download Image

उस को राँझा मत कहो, जो ना हुआ फ़क़ीर
जो ना जोगन हो सकी, सो काहे की हीर!

27

Download Image

मिरी रौशनी तिरे ख़द्द-ओ-ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर
तू क़रीब आ तुझे देख लूँ तू वही है या कोई और है

26

Download Image

दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी
'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए

24

Download Image

बदल जा तू नहीं तो रब का ये पैग़ाम आएगा
तू ज़ालिम हर जगह से बेबस-ओ-नाकाम आएगा

हमारे मुल्क की बर्बादियों का ज़िक्र जब होगा
सर-ए-फ़ेहरिस्त ऐ ज़ालिम तेरा ही नाम आएगा

15

Download Image

वो और लोग हैं जिन को 'अज़ीज़ है दुनिया
तिरे फ़क़ीर ने दुनिया लुटा के रक़्स किया

10

Download Image

सिकंदर मिलेंगे बहुत इक जगह पर
कभी शाम तुम मय-कदे में गुज़ारो

10

Download Image

गुज़ार देते हैं रातें पहलू में उस के
जुगनू को भी दर का फ़क़ीर बना रखा है

9

Download Image

ख़ूब-सूरत और भी हैं इस जहाँ में लड़कियाँ
तुम मगर हो जान-ए-जाँ सब लड़कियों से मुख़्तलिफ़

6

Download Image

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं
जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला

43

Download Image

'मुख़्तलिफ़' शब्द विविधता और भिन्नता का सुझाव देता है। कविता में, यह अक्सर प्रकृति, संस्कृति या मानव भावनाओं में पाई जाने वाली सुंदरता को उजागर करता है। यह जीवन के ताने-बाने में प्रत्येक तत्व द्वारा लाई गई विशिष्टता का उत्सव मनाता है।

कवि 'मुख़्तलिफ़' का उपयोग विविधता से आने वाली समृद्धि पर जोर देने के लिए करते हैं। इसका उपयोग अक्सर साधारण और असाधारण के विपरीत करने के लिए किया जाता है, जो जीवन की जीवंतता को उजागर करता है।

'मुख़्तलिफ़' में, हम जीवन के असंख्य रूपों का उत्सव पाते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि सुंदरता अक्सर अप्रत्याशित और विविध में होती है।