Meaning of

नार

naar • نار

आग; नरक की आग; तीव्र जुनून

fire; hellfire; intense passion

آگ; جہنم کی آگ; شدید جذبہ

Arabic

एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

50

Download Image

उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं

128

Download Image

अव्वल तो मैं नाराज़ नहीं होता हूँ लेकिन
हो जाऊँ तो फिर मुझ सेा बुरा होता नहीं है

101

Download Image

साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं
इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं

उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ
रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं

86

Download Image

ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझ को आदत है मुस्कुराने की

69

Download Image

किसी बहाने से उस की नाराज़गी ख़त्म तो करनी थी
उस के पसंदीदा शाइ'र के शे'र उसे भिजवाए हैं

67

Download Image

ग़ज़ल की नाव में बैठे हुए हम
तेरे ग़म से किनारा कर रहे है

59

Download Image

किनारा कर लिया अच्छा किया प्यारे
मुहब्बत नाम है उस का डुबा देती

59

Download Image

सवाल ये है कि आपस में हम मिलें कैसे
हमेशा साथ तो चलते हैं दो किनारे भी

57

Download Image

बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं
कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं

52

Download Image

एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

50

Download Image

उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं

128

Download Image

'नार' मूल रूप में जलती हुई आग की छवि प्रस्तुत करता है, जो अक्सर दंड या शुद्धिकरण से जुड़ी होती है। कविता में, यह जलते हुए जुनून या असीमित इच्छा का प्रतीक बन जाता है, जो मानवीय भावनाओं की तीव्रता को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'नार' का उपयोग प्रेम या लालसा की जलती हुई प्रकृति को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह ठंडी, शांत छवियों के विपरीत है, भावनाओं की तीव्रता और तात्कालिकता को उजागर करता है।

नार विनाश और जुनून की द्वैतता को समेटे हुए है, एक ऐसी लौ जो जलाती भी है और रोशनी भी देती है।