Meaning of

नात

naat • نات

पैगंबर की प्रशंसा; भक्ति कविता

praise of the Prophet; devotional poem

نبی کی تعریف; عقیدتی نظم

Arabic

तेरी तस्वीर अगर बनाते हम
तेरे बारे में क्या बताते हम

ढूँढ़ना है उसे अंधेरे में
और दिया भी नहीं बनाते हम

54

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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी
यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी

155

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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं
प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं

141

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

87

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ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने
बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला

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हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी
नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी

दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी
हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी

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राम भी हैं कृष्ण भी हैं और भोलेनाथ हैं
माँ तुम्हारे साथ हैं तो सब तुम्हारे साथ हैं

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घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए
मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

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उसे पागल बनाती फिर रही हो
जिसे शौहर बनाना चाहिए था

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रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर
जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं

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तेरी तस्वीर अगर बनाते हम
तेरे बारे में क्या बताते हम

ढूँढ़ना है उसे अंधेरे में
और दिया भी नहीं बनाते हम

54

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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी
यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी

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नात एक प्रकार की कविता है जो पैगंबर मुहम्मद की प्रशंसा और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए समर्पित है। यह गहरी भक्ति और प्रेम से परिपूर्ण है, कवि और दिव्य के बीच की आध्यात्मिक संबंध को पकड़ता है। कविता में, यह मात्र प्रशंसा से परे है, विश्वास और भक्ति की हार्दिक अभिव्यक्ति बन जाती है।

कवि 'नात' का उपयोग अपनी आध्यात्मिक भक्ति और पैगंबर के प्रति प्रेम व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर सभाओं में सुनाया जाता है, जो एकता और साझा विश्वास की भावना को जगाता है।

नात सांसारिक और दिव्य के बीच एक पुल है, जहाँ शब्द भक्ति के पात्र बन जाते हैं।