baat karo roothe yaaron se sannaaton se dar jaate hain | बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं

  - Kumar Vishwas

बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं
प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं

  - Kumar Vishwas

Baaten Shayari

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    ज़ख़्म उनके लिए मेहमान हुआ करते हैं
    मुफ़लिसी जो तेरे दरबान हुआ करते हैं

    वो अमीरों के लिए आम सी बातें होंगी
    हम ग़रीबों के जो अरमान हुआ करते हैं
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    Mujtaba Shahroz
    तुम्हें ये किसने कहा रब को नहीं मानता मैं
    ये और बात कि मज़हब को नहीं मानता मैं
    Bhaskar Shukla
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    वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
    दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा
    Amjad Islam Amjad
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    तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
    तुम को देखें कि तुम से बात करें
    Firaq Gorakhpuri
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    हमको तो प्यार चाहिए था तेरा प्यार सिर्फ़
    इस बात से वफ़ा का कोई वास्ता नहीं
    Vikas Rajput
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    बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी
    हम निहत्थों पे उसने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी

    साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं
    उसने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी
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    Khurram Afaq
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    हर किसी से ही मुहब्बत माँगता है
    दिल तो अब सबसे अक़ीदत माँगता है

    सीख आया है सलीक़ा ग़ुफ़्तगू का
    मुझसे मेरा दोस्त इज्ज़त माँगता है
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    वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
    एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

    उसकी आँखे उसकी बातें उसके लब वो चेहरा उसका
    हम उसकी हर एक अदा से अपना हिस्सा माँग रहे थे
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    Shikha Pachouly
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    जहान भर में न हो मयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना
    नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना

    कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों
    लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना
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    Vikram Gaur Vairagi
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    न उसने हाथ लगाया न उसने बातें कीं
    पड़े पड़े यूँ ही ख़ुद में ख़राब हो गए हम
    Abhishek shukla
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    उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे
    वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे
    Kumar Vishwas
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    हम कहाँ हैं ये पता लो तुम भी
    बात आधी तो सँभालो तुम भी

    दिल लगाया ही नहीं था तुम ने
    दिल-लगी की थी मज़ा लो तुम भी

    हम को आँखों में न आँजो लेकिन
    ख़ुद को ख़ुद पर तो सजा लो तुम भी

    जिस्म की नींद में सोने वालों
    रूह में ख़्वाब तो पालो तुम भी
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    Kumar Vishwas
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    हम कहाँ हैं ये पता लो तुम भी
    बात आधी तो सँभालो तुम भी
    Kumar Vishwas
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    सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा
    तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
    Kumar Vishwas
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    खुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
    इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

    देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
    ये सारे खेल हैं, इनमें उदास मत होना
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    Kumar Vishwas
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