Meaning of

नफ़स

nafs • نفس

सांस; आत्मा; स्वयं

breath; soul; self

سانس; روح; خود

Arabic

बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर

अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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ग़ज़ल बनी है ज़िन्दगी, नफ़स नफ़स है शा'इरी,
सुख़न से मेरी आशिक़ी , ग़ज़ब है बेमिसाल है

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बन कर कसक चुभती रही दिल में मिरे इक आह थी
ऐ हम–नफ़स मेरे मुझे तुझ सेे वफ़ा की चाह थी

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बे वफ़ा शख़्स तेरा नाम भी मुँह से लेना
इज़्ज़त-ए-नफ़्स की तौहीन समझता हूँ मैं

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हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी'
ज़िन्दगी नाम है मर मर के जिए जाने का

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ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम
जो याद न आए भूल के फिर ऐ हम-नफ़सो वो ख़्वाब हैं हम

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जीना वो क्या जो हो नफ़स-ए-ग़ैर पर मदार
शोहरत की ज़िंदगी का भरोसा भी छोड़ दे

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तारे नफ़स पर उँगली रख दी छेड़ के तू ने बात ग़ज़ल की
नोके क़लम से क़तरा-क़तरा जारी हैं रिशहात ग़ज़ल की

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मिटा के नफ़रतें हर दिल से, प्यार देता मैं
नफ़स-नफ़स में मोहब्बत उतार देता मैं

मुझे किसी की मोहब्बत ने कर दिया बुज़दिल
वगरना मुल्क पे ये जान वार देता मैं

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बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर

अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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‘नफ़स’ शब्द जीवन की द्वैतता को वहन करता है - वह सांस जो बनाए रखती है और वह आत्मा जो परिभाषित करती है। कविता में, यह अक्सर आत्म के आंतरिक संघर्षों, इच्छाओं और उच्च आकांक्षाओं के बीच की लड़ाई का अन्वेषण करता है, मानव अस्तित्व के सार को पकड़ता है।

कवि 'नफ़स' का उपयोग आत्मनिरीक्षण और आत्म-जागरूकता के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह आधारभूत प्रवृत्तियों और आध्यात्मिक विकास के बीच संघर्ष का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द अक्सर पवित्रता के विपरीत होता है, आत्म-साक्षात्कार की यात्रा को उजागर करता है।

‘नफ़स’ में, कवि आत्मा के इच्छाओं और प्रबोधन के बीच के अनंत नृत्य को पाते हैं।