Meaning of

नहार

nahaar • نہار

दिन; सुबह

day; morning

دن; صبح

Arabic

नाराज़ी का आलम ये है
बात करी तो रो दूँगा मैं

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ
कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ

मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है
न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है

क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को
नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है

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चमकती हैं वो हर लम्हा निहारो उस की आँखों को
वो लड़की जान है मेरी जो इस दिल में धड़कती है

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किसी हद से गुज़रना चाहता हूँ
तुम्हें छू कर बिखरना चाहता हूँ

किसी दिन पर्दे से मुझ को निहारो
मैं अब सजना सँवरना चाहता हूँ

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सजाया तो उसे होगा मगर अब ये तमन्ना है
निहारूँ मैं उसे फिर आज रंगों से सजाकर के

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आसमाँ से गिर रहा था इक सितारा टूट कर
मैं निहारूँ आसमाँ को वो दुआ तक ले गए

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ताज को कब तक निहारूँ बैठ तन्हा
या'नी मुझ को भी बनाओ संगमरमर

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वहीं उस बैंच पर बैठे उसे जब भी निहारें हम
हमें हर बात हर एक साथ अब भी याद आती है

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नज़र भर नज़र एक जब से निहारे
दिलों में रहे दिल मचल कुछ दिनों से

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नाराज़ी का आलम ये है
बात करी तो रो दूँगा मैं

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ
कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ

मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

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नहार दिन के आगमन का संकेत है, जब दुनिया रात की गोद से जागती है। कविता में, यह नए आरंभ और जीवन के दैनिक चक्र के कोमल विस्तार का प्रतीक है।

कवि अक्सर नहार का उपयोग सुबह की ताजगी को दर्शाने के लिए करते हैं। यह रात के अंधकार के विपरीत होता है, आशा और नवीनीकरण का प्रतीक है। यह शब्द सूरज की पहली किरण द्वारा लाई गई गर्मी और स्पष्टता को भी दर्शा सकता है।

नहार एक नए दिन का वादा करता है, जीवन के निरंतर नवीनीकरण की कोमल याद दिलाता है।