Meaning of

पैग़ाम

paighaam • پیغام

संदेश; पत्र; संवाद

message; letter; communication

پیغام; خط; مواصلت

Persian

बदल जा तू नहीं तो रब का ये पैग़ाम आएगा
तू ज़ालिम हर जगह से बेबस-ओ-नाकाम आएगा

हमारे मुल्क की बर्बादियों का ज़िक्र जब होगा
सर-ए-फ़ेहरिस्त ऐ ज़ालिम तेरा ही नाम आएगा

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साथ तू नहीं तो इस शाम का करूँँ मैं क्या
फ़ोन में पड़े इस पैग़ाम का करूँँ मैं क्या

चैट कॉल कर सकते हैं नहीं कभी तुझ को
वाट्सप का और इंस्टाग्राम का करूँँ मैं क्या

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दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया

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'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी
सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज

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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था
हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का

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मिरा कुछ भी नहीं मुझ
में ज़रा भी
यही इक तौर है क्या अब तिरा भी

लिया पैसा उधारी दोस्तों से
तुझे मथुरा घुमाया आगरा भी

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उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे

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एक तख़्ती अम्न के पैग़ाम की
टांग दीजे ऊंचे मीनारों के बीच

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हज़ारों बार लिख लिख कर यही पैग़ाम करता है
तेरे चुंबन के बदले जान तेरे नाम करता है

मेरे महबूब मुझ को तेरे आँखों की क़सम है ये
तेरा महबूब तुझ को याद सुब्ह-ओ-शाम करता है

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मिरी बहनों से मिलना तो उन्हें पैग़ाम ये देना
कि भाई अब नहीं तो क्या ख़ुदाई तो सलामत है

हुआ क्या जो के दुश्मन ने किया धड़ से अलग सर को
लो बाँधो राखियाँ इस
में कलाई तो सलामत है

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बदल जा तू नहीं तो रब का ये पैग़ाम आएगा
तू ज़ालिम हर जगह से बेबस-ओ-नाकाम आएगा

हमारे मुल्क की बर्बादियों का ज़िक्र जब होगा
सर-ए-फ़ेहरिस्त ऐ ज़ालिम तेरा ही नाम आएगा

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साथ तू नहीं तो इस शाम का करूँँ मैं क्या
फ़ोन में पड़े इस पैग़ाम का करूँँ मैं क्या

चैट कॉल कर सकते हैं नहीं कभी तुझ को
वाट्सप का और इंस्टाग्राम का करूँँ मैं क्या

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'पैग़ाम' का मूल अर्थ है संदेश या संवाद। कविता में, यह अक्सर दिल से निकली अभिव्यक्तियों, अनकही भावनाओं और प्रेमियों के बीच मौन फुसफुसाहट का भार वहन करता है।

कवि 'पैग़ाम' का उपयोग गहरी भावनाओं, गुप्त संदेशों और आत्माओं के बीच अनकहे बंधनों को व्यक्त करने के लिए करते हैं।

काव्य जगत में, 'पैग़ाम' दिल की मौन आवाज़ है।