मिरी बहनों से मिलना तो उन्हें पैग़ाम ये देना - Haider Khan

मिरी बहनों से मिलना तो उन्हें पैग़ाम ये देना
कि भाई अब नहीं तो क्या ख़ुदाई तो सलामत है

हुआ क्या जो के दुश्मन ने किया धड़ से अलग सर को
लो बाँधो राखियाँ इसमें कलाई तो सलामत है

Haider Khan
9

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