
मिरी बहनों से मिलना तो उन्हें पैग़ाम ये देना
कि भाई अब नहीं तो क्या ख़ुदाई तो सलामत है
हुआ क्या जो के दुश्मन ने किया धड़ से अलग सर को
लो बाँधो राखियाँ इस
में कलाई तो सलामत है
— Haider Khan
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