हज़ारों बार लिख लिख कर यही पैग़ाम करता है
तेरे चुंबन के बदले जान तेरे नाम करता है
मेरे महबूब मुझ को तेरे आँखों की क़सम है ये
तेरा महबूब तुझको याद सुब्ह-ओ-शाम करता है
As you were reading Shayari by Rakesh Mahadiuree
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