Meaning of

सुब्ह-ओ-शाम

subh-o-shaam • صبح و شام

सुबह और शाम; दिन-रात; लगातार

morning and evening; day and night; constantly

صبح اور شام; دن رات; مسلسل

Persian

मगर गुज़ारने वालों के दिन गुज़रते हैं तेरे फ़िराक़ में यूँँ सुबह-ओ-शाम करते हैं — Faiz Ahmad Faiz
कुछ काम-धाम है ही नहीं और क्या करें दिन-रात सुब्हो-शाम चलो मशविरा करें — Saarthi Baidyanath
ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें — Majrooh Sultanpuri
सुब्ह-ओ-शाम अब हम को बस उदास रहना है ग़मज़दों की मंज़िल का रास्ता उदासी है — Rohit tewatia 'Ishq'
अदू होते रहे अहबाब कैसी ये करिश्माई, इसी तदबीर में मैं रोज़ सुब्ह-ओ-शाम रहता था। — Ravi 'VEER'
यूँँ सुब्हो-शाम इसे सीने में जगह देकर हमीं ने दर्द की आदत बिगाड़ रक्खी है — Rohan Kaushik

यह वाक्यांश समय के प्रवाह, दैनिक जीवन की लय को दर्शाता है। यह निरंतरता का सुझाव देता है, एक चक्र जो आरामदायक और निरंतर दोनों है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं या स्थितियों की स्थिरता का प्रतीक होता है।

कवि इसका उपयोग स्थायी प्रेम या दुःख की भावना व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह समय के निरंतर प्रवाह या कुछ सच्चाइयों की अपरिवर्तनीय प्रकृति का भी सुझाव दे सकता है।

सुब्ह-ओ-शाम जीवन के अनंत चक्रों का सार पकड़ता है। यह परिवर्तन के बीच स्थिरता की याद दिलाता है।