Meaning of

पय

pay • پے

दूध; स्तन; पोषण

milk; breast; nourishment

دودھ; چھاتی; پرورش

Sanskrit

ज़ख़्म जो दे रहा है पैहम वो
था कभी चारा-गर मोहब्बत में

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मैं पैहम हार कर ये सोचता हूँ
वो क्या शय है जो हारी जा रही है

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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं

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ये जो तेरे होंठ पे आसीन है
ये हमारे इश्क़ की तौहीन है

हम जवानी के नशे में चूर हैं
उस पे तेरा ज़ाइक़ा नमकीन है

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चमेली रात कह रही थी मेरी बू लिया करें
और इस सेे जी नहीं भरे तो मुझ को छू लिया करें

कभी भी अच्छे देवता नहीं बनेंगे ऐसे आप
चढ़ावे में रुपए नहीं फ़क़त लहू लिया करें

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यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें

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सुनाना है जो हमें वो पयाम बाक़ी है
हमें जो करना है वो नेक काम बाक़ी है

डरो नहीं यहाँ तलवार अब उठा लो तुम
अभी तो ज़ालिमों से इंतिक़ाम बाक़ी है

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अब नहीं चाहिए शिफ़ा मुझ को
दर्द अब हो मुझे तो पैहम हो

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लबों पे आए जो नाम तेरा वही तो है ये पयाम मेरा
कभी ख़ुशी में कही ग़मी में तुझी पे है ये सलाम मेरा

7

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कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ

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ज़ख़्म जो दे रहा है पैहम वो
था कभी चारा-गर मोहब्बत में

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मैं पैहम हार कर ये सोचता हूँ
वो क्या शय है जो हारी जा रही है

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मूल रूप से 'पय' का अर्थ दूध है, जो पोषण और जीवन के आधार का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर मातृत्व की देखभाल और प्रकृति के पोषणकारी पहलुओं की छवियों को उभारता है।

'पय' का उपयोग कवि पवित्रता और मासूमियत के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह प्रकृति की जीवनदायिनी शक्ति का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द अक्सर कठोर तत्वों के विपरीत होता है, संरक्षण और देखभाल के विषयों को उजागर करता है।

'पय' की कोमलता में जीवन के पोषणकारी सार की काव्यात्मक दृष्टि मिलती है।