Meaning of

रह-ए-हक़

rah-e-haq • رہ حق

सत्य का मार्ग; धर्म का पथ

path of truth; way of righteousness

حق کا راستہ; راستبازی کا راستہ

Arabic

है बहुत ख़ुश-मिज़ाज चेहरा वो
कुछ भी सोचा तो मुझ को सूझा वो

मुझ को दो शख़्स हैं अज़ीज़ बहुत
दूसरा मैं हूँ और पहला वो

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वो हसीं चेहरा वो रुख़्सार वो दिलकश आँखें
वो ख़द-ओ-ख़ाल भुलाने में ज़माने लगे हैं

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सुनो यार ख़तरा वो अब टल गया
मैं आख़िर जो उस के गले यूँँ लगा

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इक कमरा वो है जो मुझ
में खुलता है
इक कमरा ये है जहाँ मैं खुलता हूँ

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जो आँख ने देखा नज़ारा, वो भुला भी ना सकूँ
तकलीफ़ इतनी है नज़ारों में, बता भी ना सकूँ

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जिस को देखे वो जब भी उस का वो हो जाता है
शीशा कुछ नहीं जब भी चेहरा वो हो जाता है

प्यारी सी ग़ज़ल है वो, शे'र उस की आँखें हैं
जब ग़ज़ल से गुज़रे तो मिसरा वो हो जाता है

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वो ही चेहरा वो ही आँखें वो ही दस्त-ओ-बाज़ू
दर-ओ-दीवार न बदली न ही वो घर मेरा

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मुझ को इल्हाम क्यूँ नहीं होता
जब मेरा तज़्किरा वो करती हैं

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बे-शक्ल वो सब हाथ थे जो नोचते थे जिस्म को
मशहूर चेहरा वो हुआ जिस की गई थी आबरू

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है बहुत ख़ुश-मिज़ाज चेहरा वो
कुछ भी सोचा तो मुझ को सूझा वो

मुझ को दो शख़्स हैं अज़ीज़ बहुत
दूसरा मैं हूँ और पहला वो

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वो हसीं चेहरा वो रुख़्सार वो दिलकश आँखें
वो ख़द-ओ-ख़ाल भुलाने में ज़माने लगे हैं

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'रह-ए-हक़' सत्य और नैतिक अखंडता की ओर यात्रा को दर्शाता है। यह धर्म की खोज और अपने विश्वासों का पालन करने के साहस को दर्शाता है।

कवि 'रह-ए-हक़' का उपयोग आध्यात्मिक खोज और नैतिक दुविधाओं के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर अपने सिद्धांतों के प्रति सच्चे रहने के आंतरिक संघर्ष का प्रतीक होता है।

कविता में, 'रह-ए-हक़' नैतिक और आध्यात्मिक अस्तित्व की जटिलताओं के माध्यम से आत्मा का मार्गदर्शन करने वाला एक प्रकाशस्तंभ बन जाता है।