Meaning of

रक़्स

raqs • رقص

नृत्य; गति; लय

dance; movement; rhythm

رقص; حرکت; تال

Arabic

ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है
कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है

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रक़्स करना है तो फिर होश की पाज़ेब उतार
आलम-ए-वज्द में ही बे-ख़बरी आती है

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ज़ब्त करो गर ग़म के बादल छाए हैं,
रक़्स करो के बारिश आने वाली है

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मैं होश-मंद हूँ ख़ुद भी सो मेरी ग़ज़लों में
न रक़्स करता है आशिक़ न बाल खींचता है

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हो न हो एक ही तस्वीर के दो पहलू हैं
रक़्स करता हुआ तू आग में जलता हुआ मैं

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ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को
तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है

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देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख

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उस के दर पर वहशतों का रक़्स तो जारी रखो
इम्तिहाँ हो या न हो पर अपनी तैयारी रखो

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आँखें ग़ज़ाल हिरनी हैं ज़ुल्फ़ घटा सावन
पर्वत पे रक़्साँ कोई बादल लगती हो

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वो और लोग हैं जिन को 'अज़ीज़ है दुनिया
तिरे फ़क़ीर ने दुनिया लुटा के रक़्स किया

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ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है
कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है

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रक़्स करना है तो फिर होश की पाज़ेब उतार
आलम-ए-वज्द में ही बे-ख़बरी आती है

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'रक़्स' का मूल अर्थ नृत्य है, जो गति और लय का उत्सव है। कविता में यह शारीरिक से परे जाकर जीवन के नृत्य, भावनाओं के उतार-चढ़ाव और ब्रह्मांड की लय का रूपक बन जाता है।

कवि अक्सर 'रक़्स' का उपयोग भावनाओं के नृत्य या ब्रह्मांडीय नृत्य को दर्शाने के लिए करते हैं। यह आनंद, स्वतंत्रता या जीवन के अनिवार्य चक्रों का प्रतीक हो सकता है।

'रक़्स' शरीर और आत्मा दोनों में गति का सार पकड़ता है, एक शाश्वत नृत्य जिसे कवि निरंतर मनाते रहते हैं।