Meaning of

ऋचा

richa • رچا

भजन; श्लोक

hymn; verse

بھجن; شلوک

Sanskrit

इश्क़ किया है तुम से चर्चा तो होगा
रूठी हो तुम? या'नी खर्चा तो होगा

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हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

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किसी को फिर भी महँगे लग रहे थे
फ़क़त साँसों का खर्चा था हमारा

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इश्क़ कहाँ अब पहले वाला होता है
इश्क़ से बढ़कर इश्क़ का चर्चा होता है

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कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा

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अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ
इक ज़रा शे'र कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ

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बस इक ज़रा निगाह उचटती सी डाल कर
वो कह रहे हैं इतने में खर्चा निकालिए

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तुझे हम ख़ुश रखेंगे ज़िंदगी भर
ये वा'दा है, मगर दावा नहीं है

ग़ज़ल में बस उदासी भर रखी है
ज़रा भी हुस्न का चर्चा नहीं है

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उस के गालों पे किसी और का छाएगा रंग
रक्खे रह जाएँगे इस बार भी ये मेरे गुलाल

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अपने हाथों पे वो मेहँदी को रचाती होगी
जान सज कर के वहाँ मन को लुभाती होगी

इस जहाँ के कोई गुमनाम इलाक़े में दोस्त
मेरी अम्मी की बहू ईद मनाती होगी

7

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इश्क़ किया है तुम से चर्चा तो होगा
रूठी हो तुम? या'नी खर्चा तो होगा

6

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हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता

68

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मूल रूप में 'ऋचा' एक पवित्र भजन या श्लोक है, जो अक्सर वैदिक ग्रंथों का हिस्सा होता है। यह दिव्य संचार का भार वहन करता है, मानव और दिव्य के बीच एक सेतु। कविता में, यह अपने धार्मिक मूल से परे जाकर कालातीत ज्ञान और आध्यात्मिक गहराई का आभास कराता है।

'ऋचा' का उपयोग कवि प्राचीन ज्ञान की भावना को जागृत करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग दिव्यता से संबंध सुझाने या गहन सत्य व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह शब्द आधुनिकता के साथ विपरीत भी हो सकता है, शाश्वत और क्षणिक के बीच अंतर को उजागर करते हुए।

'ऋचा' प्राचीनों की शाश्वत आवाज़ का प्रतीक है, कविता की भाषा में दिव्यता की एक फुसफुसाहट।