Meaning of

रिपु

ripu • رپ

दुश्मन; शत्रु

enemy; foe

دشمن; حریف

Sanskrit

प्रेम राधा प्रेम मोहन है
प्रेम स्याही प्रेम दरपन है

5

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

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हंगामा है क्यूँँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है

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बात ज़रा आगे बढ़ सकती है 'दर्पन'
अब इक नंबर डायल भी हो सकता है

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ना तो कुछ सुनते हैं ना ही बोल कुछ पाते हैं हम
सामने उन के सरापा आँख हो जाते हैं हम

वो निगाहें इन निगाहों से कभी हटती नहीं
वरना कितनी ही निगाहें हैं जिन्हें भाते हैं हम

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धौल-धप्पा उस सरापा नाज़ का शेवा नहीं
हम ही कर बैठे थे ‘ग़ालिब’ पेश-दस्ती एक दिन

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ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी
फल से भरपूर तो हो लेने दो

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बहुत मैं हिम्मत भी कर के 'दानिश' सभी को दर्पण दिखा रहा हूँ
मरा पड़ा है यहाँ का मुंसिफ़ यही तो मैं सच बता रहा हूँ

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ये न पूछो आत्म क्या है
देह का दर्पण समझ लो

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अपने दौर की सब सेे टेढ़ी लड़की मैं
वो इस दौर का सब सेे सीधा लड़का है

एक ही ऐब है उस
में सिगरेट पीता है
बाक़ी सरापा इकदम आला लड़का है

13

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प्रेम राधा प्रेम मोहन है
प्रेम स्याही प्रेम दरपन है

5

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

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मूल रूप में 'रिपु' का अर्थ प्रतिद्वंद्वी या विरोधी होता है, जो अक्सर युद्ध या प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में प्रयोग होता है। कविता में, यह शब्द आंतरिक और बाहरी संघर्षों को दर्शाता है, जो दिल और दिमाग की लड़ाइयों का प्रतीक है।

'रिपु' का उपयोग कवि अक्सर शत्रुता और संघर्ष के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी के आंतरिक संघर्ष या अन्याय के खिलाफ सामाजिक संघर्षों का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

कविता में, 'रिपु' अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर आत्मा की लड़ाइयों का दर्पण बन जाता है।