Meaning of

रोज़-ए-बद

roz-e-bad • روز بد

दुर्भाग्य का दिन; अशुभ दिन

day of misfortune; ill-fated day

بدقسمتی کا دن; منحوس دن

Persian

सूरज कस के जलता है
पत्थर रोज़ पिघलता है

सूख गया दरिया सारा
मौसम रोज़ बदलता है

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इक रोज़ बदलूँगा पुरानी सब मिसालें देखना
मैं हीर को ग़ज़लों में राँझे से मिलाऊँगा कभी

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हर तौर से मैं एक ही मंज़र की तरह हूँ
देखो मुझे बाहरस भी अंदर की तरह हूँ

हर रोज़ बदलता है मेरी सोच का मौसम
शीशा न मुझे जान मैं पत्थर की तरह हूँ

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दिल मिरी न माने क्यूँ रोज़ बदल जाता है
ये ठोकर खाता है और सँभल जाता है

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रोज़ बदलता है स्टोरी अपनी वो
हर तस्वीर हिफ़ाज़त से रक्खी है

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सूरज कस के जलता है
पत्थर रोज़ पिघलता है

सूख गया दरिया सारा
मौसम रोज़ बदलता है

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इक रोज़ बदलूँगा पुरानी सब मिसालें देखना
मैं हीर को ग़ज़लों में राँझे से मिलाऊँगा कभी

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‘रोज़-ए-बद’ उस दिन की भावना को व्यक्त करता है जब सब कुछ विपरीत हो जाता है, जब भाग्य की दिशा बदल जाती है और व्यक्ति खुद को निराशा की छाया में पाता है।

कवि अक्सर 'रोज़-ए-बद' का उपयोग खुशी और भाग्य के दिनों के विपरीत करते हैं। यह व्यक्तिगत या सामूहिक विपत्ति का रूपक बनता है। यह खुशी की क्षणभंगुरता को भी उजागर कर सकता है।

कविता की दुनिया में, 'रोज़-ए-बद' हमें खुशी और दुख के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।