Meaning of

साहब-ए-फ़न

sahib-e-fan • گنگا

कला का माहिर; कुशल व्यक्ति

master of art; skilled person

فن کا ماہر; ماہر شخص

Persian

तरकीब क्या खोजी सभी ने पाप धोने के लिए
लाखों किए हैं पाप पर गंगा नहाना चाहिए

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ
कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ

मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था
अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

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हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

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इस का अपनी ही रवानी पर नहीं है इख़्तियार
ज़िंदगी शिव की जटाओं में है गंगा की तरह

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मैं अलकनन्दा सा होता और वो मंदाकनी सी
फिर कहीं पर साथ मिलते और गंगा होते जाते

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गुम सुम होकर जिस की याद में रहती हो
उस बिन तो तुम सब सेे बा'द में रहती हो

गंगाजल के जैसे निर्मल बोली है
या'नी के तुम इलाहाबाद में रहती हो

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जिस ने गंगा में वुज़ू कर के नमाज़े हैं पढ़ी
वो कभी मुल्क के ग़द्दार नहीं हो सकते

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अब ख़ुद को रौशन करना है
पतझड़ को सावन करना है

आँखों से बहते दरिया को
गंगा सा पावन करना है

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फेंक आया जो लाश गंगा में
क़त्ल था ख़ुद-कुशी नहीं थी वो

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तरकीब क्या खोजी सभी ने पाप धोने के लिए
लाखों किए हैं पाप पर गंगा नहाना चाहिए

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ
कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ

मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

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साहब-ए-फ़न एक ऐसे व्यक्ति को दर्शाता है जो किसी कला रूप में महारत रखता है। अपने सार में, यह कौशल और रचनात्मकता का उत्सव मनाता है। कविता अक्सर इस शब्द को उन लोगों का सम्मान करने के लिए ऊंचा करती है जिनकी प्रतिभा साधारण से परे है, सृजन की दिव्य चिंगारी को पकड़ती है।

कवि साहब-ए-फ़न का आह्वान कलाकारों और रचनाकारों को श्रद्धांजलि देने के लिए करते हैं। इसका उपयोग असाधारण प्रतिभाओं और कला की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर करने के लिए किया जाता है। यह शब्द अक्सर औसत दर्जे के विपरीत खड़ा होता है।

साहब-ए-फ़न मानव रचनात्मकता की असीम संभावनाओं को श्रद्धांजलि है।