Meaning of

शाम–ओ–सहर

shaam–o–sehr • شام و سحر

शाम और सुबह; संध्या और प्रातः

evening and morning; dusk and dawn

شام اور صبح; غروب اور طلوع

Persian

भटकता नवी यूँँ ही बस हर पहर
है इस शहर से एक शाम-ओ-सहर

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अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं
कोई तस्वीर हो जैसे अधूरी

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ज़िन्दगी अपने लिए ख़ुद मौत बोती जाएगी
शाम होते ही घनेरी रात होती जाएगी

एक दिन मेरी चिता तैयार कर लेंगे सभी
और फिर शाम-ओ-सहर बरसात होती जाएगी

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बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है

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आप जैसा आप को ही हो मुबारक
अब मनाना जश्न ही शाम-ओ-सहर तक

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हर्फ़-ए-दुआ में मेरे वो शाम-ओ-सहर रहता तो है
पर ऐ ख़ुदा वो मेरा हो कर भी मिरा होता नहीं

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कौन शाम-ओ-सहर नज़र आए
दर्द ही दर्द जब नज़र आए

ज़िन्दगी में ख़ुशी तलाशें हम
रौशनी भी अगर इधर आए

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दिल के उजड़े हुए मन्दिर को यूँँ आबाद किया
आप को हम ने शजर शाम ओ सहर याद किया

हज़रत-ए-क़ैस भी हैराँ हैं मेरी हालत पर
ख़ुद को इस तरह तेरे हिज्र में बर्बाद किया

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हमीं देते हैं पत्थर को कोई चेहरा
हमीं हैं पूजते शाम-ओ-सहर उस को

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बे-रंग ये ज़िंदगी रंग से भर के
ख़ुशहाल शाम-ओ-सहर कर दिए आप

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भटकता नवी यूँँ ही बस हर पहर
है इस शहर से एक शाम-ओ-सहर

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अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं
कोई तस्वीर हो जैसे अधूरी

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यह वाक्यांश समय के शाश्वत चक्र को दर्शाता है, शाम की शांति और एक नए सवेरे के वादे के बीच के संक्रमण को पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर समय के प्रवाह और जीवन के क्षणों की द्वैतता का प्रतीक होता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग परिवर्तन और निरंतरता के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह संक्रमण की सुंदरता या समय के प्रवाह की अनिवार्यता को दर्शा सकता है।

शाम-ओ-सहर जीवन के क्षणभंगुर पलों के नाजुक संतुलन को पकड़ता है।