Meaning of

शफ़क़

shafaq • شفق

संध्या; गोधूलि; सांझ की लालिमा

twilight; dusk; evening glow

شفق; شام کا وقت; شام کی لالی

Arabic

तेरे बदन पर भी शफ़क़ आने लगी
तू ही बता अब कौन चाहेगा तुझे

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माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है

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ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते
तुम नहीं हो तो नज़ारे नहीं अच्छे लगते

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किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए
कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया

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हक जताती रह गई दुनिया "शफ़क़"
चूम कर वो तुझ को जूठा कर गई

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अब न मिलना "शफ़क़" तू भी उस सेे
वो दगा तुझ सेे करने पर भी है

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हर किसी का घर हो रौशन इस दिवाली
कोई सूना हो न आँगन इस दिवाली

इस दिवाली कोई भूखा भी न सोए
सब की थाली में हो भोजन इस दिवाली

हर दिया रौशन करे सरहद को जगमग
घुस न पाए कोई दुश्मन इस दिवाली

घर सजाकर करना स्वागत लक्ष्मी का
लक्ष्मी आएगी छन छन इस दिवाली

मन लगाकर करना पूजा तुम "शफ़क़" जी
फिर पटाख़े होंगे दन दन इस दिवाली

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शफ़क़त भुलाया मुफ़्लिसी को देख कर
पैसा नहीं है बोलता किस ने कहा

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गर्व मुझ को क्यूँ न हो ख़ुद पर भला
जन्म क्षत्रिय वंश में मैं ने लिया

नाम है संदीप ग़ज़लों में शफ़क़
ग्राम बड़दा है जहाँ माँ नर्मदा

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नशा ये हुस्न का तेरे मुझे फीका नहीं लगता
शफ़क़ का रंग भी मुझ को तेरे जैसा नहीं लगता

चखी है चाशनी जबसे तेरे इन सुर्ख़ होंठो की
तेरे लब के सिवा कुछ भी मुझे मीठा नहीं लगता

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तेरे बदन पर भी शफ़क़ आने लगी
तू ही बता अब कौन चाहेगा तुझे

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माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है

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शफ़क़ वह नाज़ुक समय है जब दिन रात से मिलता है, एक परिवर्तन का क्षण जो रंगों और शांति से भरा होता है। कविता में, यह परिवर्तन, सौंदर्य की क्षणभंगुरता और अंत की कोमलता का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'शफ़क़' का उपयोग परिवर्तनों की सुंदरता को प्रकट करने के लिए करते हैं। यह यात्रा के अंत, परिवर्तन की शांत स्वीकृति, या यादों की कोमल चमक का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द दिन के कठोरता के विपरीत होता है, एक शांत प्रतिबिंब प्रदान करता है।

शफ़क़ जीवन के परिवर्तनों की क्षणभंगुर सुंदरता को पकड़ता है। यह अंत में मिलने वाली कृपा की एक कोमल याद दिलाता है।